खामोश स्मृतियाँ
खामोश खड़ी मैं सोच रही,
 स्मृतियाँ की गठरी थामे,
 दिन, सप्ताह, फ़िर महीने बीते,
 बीत गए फ़िर इतने साल ।

अब तक भटके सिर्फ राहों में
 दिन गवाँये बेकार कामों में
 न चले हम कभी मंजिल को
 मिलती कैसे कामयाबी फ़िर जीवन में ।

करने का कुछ अगर संकल्प जगे,
 तो शायद हम कुछ कर जाए,
 नए साल के नए दिवस में
 नयी मंज़िल हम फ़िर पा जाये ।

जीवन बने अब हर पल सार्थक
 बीते ना जिंदगी अब एक पल निरर्थक,
 नए समय में पूजा यही ईश्वर को मेरी
 अच्छे कामो के फूल हो पूजा में अर्पण ।
अस्तित्वा
astitvaअपने आपको इस जहा में ढूँढती हूँ
 कभी यहाँ तो कभी वहाँ ढूँढती हूँ
 लगी हूँ तलाशने मैं अपने अस्तित्व को
 कैसा है ये मुकाम ढूँढती हूँ।

मैं किसकी हूँ कौन है मेरा
 कैसा है ये रैन बसेरा
 लोगो से मेरे इस जंहा मैं अपना नाम ढूँढती हूँ
 कभी यहाँ तो कभी वहाँ ढूँढती हूँ।

क्यूँ धुंधला लगता है मुझे अस्तित्व मेरा
 क्यूँ फ़ीका लगता है मुह्जे व्यक्तित्व मेरा
 इन उलझनों की कसमकस में
 अपनी पहचान ढूँढती हूँ ।

कभी यहाँ तो कभी वहाँ ढूँढती हूँ ।
रुपया
imaeeegesरुपया रुपया रुपया
 सब जग बोले रुपया
 हाय रुपया, हाय रुपया
 हाय रुपया
 मैं हूँ चीज़ बेमिसाल
 बस्ती सबकी मुझ में जान
 मैं रहता हूँ जिसके भी पास
 वो समझे खुद को महान
 मेरे बिना कुछ काम न होता ,
 मैं न हूँ तो इंसान है रोता,
 रुपया, रुपया, रुपया
 सब जग बोले रुपया
 मैं हूँ तो सब जग अपना,
 नहीं तो केवल एक भ्रम सपना,
 आज जग की मैं रानी नहीं, अरे भाई, रानी नहीं
 मैं हूँ जगत महारानी
 अपने मुँह क्या अपनी बड़ाई,
 सब जन जानते है मुझको भाई,
 रुपया, रुपया, रुपया
 मेरा नाम है रुपया ।