नारी हो तो ऐसी हो
nari-ho-tho-aiseविश्व का वो करे उपकार
 सदा सन्मार्ग विहारी हो
 घर्म में रहे वो हमेशा हमेशा तत्पर
 सत्य भ्रण शील नारी है ।

प्रेम की सरिता बहती हो
 नारी हो तो ऐसी हो

सुख की दृष्टि वो बरसते,
 वीर गण गरिमा धरी हो,
 राष्ट्र की दीप्ति को चमकाये,
 जगत मैं महिमा धारी हो

कर्म मैं रहे हमेशा निष्काम
 नारी होतो ऐसी हो
माँ का सपना
maa-ka-sapnaहैं माँ बहुत खुश
 बेटी की बारात आयेगी
 इसलिए दिया सामान इतना
 बेटी रहे वह खुश ।

पैर ससुराल मैं बहू
 रास नहीं आयी,
 सबने मिलकर उसे
 मार ही तो डाला

ख्वाब दुल्हन के
 रोज यहाँ बिखरते हैं
 रोज चिता जलती हैं
 रोज माँ मरती हैं।

बदले हम खुद को
 तो समाज बदलेगा
 वार्ना रोज बेटियाँ
 यूँ ही मरती रहेगी ।
कलयुगी रावण
kalyugi-ravanहर साल जलाते हैं हम
 उस लंकाई रावण को
 जिसमे थे दस शीश
 क्यों भूल जाते हैं हम

आज के उस कलयुगी रावण को
 जो करते हैं सिताओं का हरण
 फ़िर करते बलात्कार
 फ़िर उसे देते हैं मार

रावण तो फ़िर भी था भला
 उसने सीता को भी नहीं छुआ
 पर आज के कलयुगी रावण
 एक से बढ़कर एक, करते हैं

मनमानी अत्याचार
 फ़िर भी क्यों मां हैं समाज
 मेरा वश चले तो एक एक
 को चुन कर लगा दूँ उनमें आग

ताकि मुक्त हो जाए आज की बालाएँ
 और बच जाए आज ये समाज
 दशहरे का असली मतलब तो ये हैं

कि समाज से बुराई रूपी रावण का पुतला जले
 और एक समय समाज हम सबके बीच पले।