हम हैं बच्चे भोले भले
hum-bache-bhole-bhaleबगिया मैं खिलते फूलों जैसे
 सुगंध फैलाते हैं जग में सारे,
 माँ बाप की आँखों के तारे,
 हम हैं बच्चे भोले भाले ।

जीव मुक्त हैं ध्येय हमारा
 ज्ञान ही हैं श्रेय हमारा
 हम ज्योति को जागने वाले
 हम बच्चे भोले भाले ।

देह का हमें अभिमान नहीं,
 माया से हमें प्यार नहीं,
 विकारो को हम तजने वाले,
 हम हैं बच्चे भोले भाले ।

काम क्या ऐसा जो न कर पाए
 मुश्किल के पीछे हम पड़ जाए
 हम न कभी पथ से हटने वाले
 हम हैं बच्चे भोले भाले ।

घर-घर के प्रकाश पुंज हम
 पथ का संदेश पहुचाएंगे,
 हम प्रीति को जग में बढाने वाले,
 हम हैं बच्चे भोले भाले ।
बुज़ुर्ग
bujurgउम्र की तमाम गलियों
 वक़्त के अनुभव सीख
 इंसान बन जाता है जब बुजुर्ग

हमे बनाने में कली से फ़ूल खिलने में
 सारी उम्र गवाँ देता है जब बुजुर्ग,

अपनी सीख अनुभव को
 हमसे बाँटना चाहता है जब बुजुर्ग,

हम समझते है उसे फ़िर ना समझ
 दे देते है उसे फ़िर एक टीस एक दर्द,

चुपचाप पीकर इस दर्द को
 फ़िर भी मुस्कुराता है बुजुर्ग ।

क्यों भूल जाते हैं ये हम सब,
 हमें भी बनना हैं एक दिन बुजुर्ग ।
 जो हो रहा हैं उनके साथ
 बीतेगा एक दिन वो भी हमारे साथ
 जब हम पर ये बीतेगी, तो होता हैं उनके दर्द का अहसास।

हमें उनके दर्द का अहसास होता हैं तब,
 दुनिया छोड़कर चला जाता हैं बुजुर्ग ।
भाई-बहन का प्यार
bhai-bahen-ka-pyarभात बरण खातिर आया,
 भैया भाभी म्हारा द्वारा,
 ख़ुशी से मैं हो गयी पागल,
 कइया कैसे भूलेगी सब स्वागत सत्कार ।

पर जब याद दिलायी नंदन,
 थे भाभी करो स्वागत सत्कार,
 तो मैं लाया भरकर थाली
 आरता को सामान ।

लाल चुनड़ी देख कर आयी माँ की याद,
 माँ का जाया वीर खड़ा है आज म्हारा द्वार ,
 भाभी जी भी आज इतरा रही है,
 अपनी ननद पर वारी जा रही है ।

भाई - बहन का देख कर यो प्यार,
 भूल गया सब वो नेग चार,
 दुनिया मैं अगर कुछ सच्चो हों
 तो वो है बहन को प्यार ।