गुस्सा
angerएक लड़के को बात-बात पर बहुत गुस्सा आता था उसकी इस हरकत से उसके पिताजी बहुत परेशान थे। उन्होने मन ही मन एक उपाय सौचा, और अपने लड़के को बुलाया - उन्होनें उससे कहा कि - जब भी तुम्हें गुस्सा आये तो एक कील दीवार में ठोंक देना इतना कह कर किलों से भरा डब्बा अपने लड़के को दे दिया अब लडका दिन में जितनी बार भी गुस्सा करता, उतनी कील दीवार में ठोंक देता था। धीरे-धीरे उसकी ये आदत गुस्सा करने की खत्म हो गयी। तो उसने अपने पिताजी से कहा कि पिताजी अब मुझे गुस्सा नहीं आता है तो उसको पिताजी ने कहा शाबाश बेटे अब सारी कीलें दीवार से निकाल लो बेटे ने सारी कीलें दीवार से निकाल ली जहॉ-जहॉ कीले ठोकी थी वहॉ सुराख बन गया तो पिताजी ने कहा बेटे बातों का घाव इन्सान का कभी नहीं भरता-मार का घाव भर जाता है। इसलिए गुस्सा कभीं नहीं करना चाहिए।

........संतोष बोन्दिया